'सब ठीक हो जाएगा' इतना कह देने से सब कहाँ ठीक हो पाता है। क्या सब ठीक करने के लिए लगती होंगी हज़ारों मिन्नतें, कई वायदे और आइंदा न होने का भ्रम । कितने हिस्से और कितने टुकड़ों में बिखर के बोलना होता होगा कि सब ठीक हो जाएगा मगर सब ठीक होना होता तो ये कहना क्यों होता और अगर कहना है तो होने पर संशय है। सब ठीक कर देने की बात को तो बस कह भर देना होता है लेकिन सोचता कौन है कि कितना बिगड़ा है और गर बिगड़ा है तो तुम्हारा हाथ कितना था । बस हम ठीक कर देने की बात कर आते हैं और सामने वाले को एक झूठी मृगतृष्णा दिखा आते हैं जबकि हमें खुद नही पता होता कि सब ठीक होगा या नही । बस सब ठीक हो जाये पर क्या पता जब ठीक हो तब कोई इस ठीक होने की चाहत को भुला चुका हो।
Thursday, 25 March 2021
Thursday, 27 August 2020
क्यों सब छूट रहा है
ये दिन ढलता क्यों नही, धूप जाती क्यों नही
हरे भरे रास्ते अब बूढ़े हो चले हैं, रात में जलने वाले बल्ब अब बुझते क्यों नही
बातें हुईं इतनी की सच मैं भूलने लगा
कोई क्या करेगा प्रेम जब खुद के लिए इतनी नफरत दबाये हैं
चांद अब दिखता क्यों नही है ,आसमान अब रिस्ता क्यों नही है
आंखों की तिजोरियों में कई सपनें संजोये हैं
दूर गांव मैंने भी फूलों के तकिये बिछाये हैं
तो क्या हुआ अब जो सांस थमने लगी, चंचल आंखे अब कही जमने लगी
सवाल इतने कम क्यों होने लगे हैं
सफर अब घटने क्यों लगा है
हम कितने बेदाग थे जो ये दाग लगने लगा
हम कितने बेआवाज थे जो ये आवाज़ अब दबने लगा
माघ की सर्दी अब भादो में क्यों लगती है
रिश्ते कई अब क्यों इतने ठंडे हो चले है
ये दिन ढलता क्यों नही ,धूप जाती क्यों नही
ताकि रात आ सके और कोई उस अंधरे में सो सके इन सब उलझनों दे दूर
Monday, 3 August 2020
मी-लार्ड की राखी.
रक्षाबंधन का अर्थ होता है रक्षा करने वाला बंधन. ये बंधन बहनें अपने भाइयों को बांधती हैं और ज़रूरी नहीं कि भाई खून का संबंध रखता हो. रिश्ता बस विश्वास भर का होना चाहिए फिर चाहे राम हो या रहीम फ़र्क़ नहीं पड़ता. इसी बीच मध्यप्रदेश हाइकोर्ट में लड़की से छेड़छाड़ के मामले में एक आरोपी को जज ने इस शर्त पर ज़मानत दी कि वो उस लड़की से जाकर राखी बंधवायेगा और शगुन में ग्यारह हज़ार रुपये देगा. मुझे इस देश के न्यायव्यवस्था के विवेक पर शंका होती है..क्या ये सही तरीका था उस लड़की के लिए जिससे उस लड़के ने छेड़छाड़ की होगी और अब वो उससे रक्षा की उम्मीद रखने लगेगी? न्यायालय भी उस खाप पंचायत की तरह काम करने लगा है जहां किसी लड़की के बलात्कारी की सज़ा ये होती है कि वो लड़की से शादी कर ले.
जब कोर्ट अपने काम का तरीका बदल कर समाज में उदाहरण पेश करके वाहवाही टोहने लगती हैं तब कहीं एनकाउंटर और इंस्टेंट जस्टिस जैसी चीज़ भी दूसरे धड़े से आने लगती हैं. हम समाज के तौर पर बहुत अविकसित हैं इन सब स्टंट के लिए और कोई भी न्याय ऐसा नहीं होना चाहिए जैसे मध्यप्रदेश के उज्जैन की रहने वाली उस महिला के साथ हुआ वरना कोर्ट एक्सपेरिमेंट करता रह जायेगा और समाज कोर्ट की पहुँच से दूर हो जाएगा फिर कानून के लंबे हाथ किसी काम के नहीं रह जाएंगे.
Sunday, 12 July 2020
लॉकडाउन के बाद हम लंच पर एक ही इंसान के साथ रहेंगे। चाय भी उसी के साथ पी लेंगे। घूमना-फ़िरना भी उन्हीं के साथ हो जाएगा। कुछ और होना होगा तो वो भी उन्हीं के साथ हो जाएगा! जब ज़िन्दगी भर ये सारे काम एक ही इंसान के साथ करने हैं तो अलग़-अलग़ लोगों के साथ रहकर क्या करेंगे हम!
ज़रूरत हुई तो बताई भी जाएगी लेकिन बता कर भी क्या करेंगे हम और ज़रूरत हुई तो जताई भी जाएगी लेकिन जता के फिर क्या करेंगे हम.
ज़रूरत हुई तो बताई भी जाएगी लेकिन बता कर भी क्या करेंगे हम और ज़रूरत हुई तो जताई भी जाएगी लेकिन जता के फिर क्या करेंगे हम.
Saturday, 4 July 2020
धन्यवाद
धन्यवाद सबको जिन्होंने जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं,मुबारकबाद या विश किया. जब कभी उदास होऊंगा तो आपकी लिखी शुभकामनाओं को पढ़ लूंगा, कितना अच्छा होता है जन्मदिन वाला दिन...भूल चुके लोग आपको फिर से एक बार याद कर लेते हैं. कभी कभी खुद पर संशय होता है कि जितना आप पर यकीन किया जाता है वो किया जाना चहिये या नही, जितना प्रेम किया जा रहा हो वो किया जाना चाहिए या नही. जवाब एक ही होता है 'सब भोलेनाथ की कृपा है'। धन्यवाद इस दिन को इतना सुंदर बनाने के लिए दोस्तों. इसे याद रखा जा सकता है. पीस आउट.
Friday, 8 May 2020
क्या लोग कोरोना की वजह से तनाव में आ गए है?
दुनिया ने साल 2020 की शुरुआत बड़े जोड़ शोर से की होगी । सब ने इस साल खुद को बेहतर बनाने और देश,दुनिया और समाज को नए हासिये पर गढ़ने के लिए कई रेसॉल्युशन्स लिए होंगे । सब ने सोचा होगा इस साल कुछ ज्यादा पढ़ेंगे ,कुछ ज्यादा खाएंगे-पियेंगे,कुछ ज्यादा जियेंगे। लेकिन कहानी बदलती है मार्च के महीने से , पूरे देश में तालाबंदी हो जाती है और सारे रेसोल्यूशन और सारी रणनीति ठंडे बस्ते में चली जाती है । लोग अपने ही घर के कैदी बन कर रह जाते है । आलम ये है कि परिवार कल्याण फोरम के कहना है कि इस लॉक डाउन का असर लोगों के आपसी रिश्तों पर पड़ेगा और आने वाले समय में तलाक का आंकड़ा बढ़ सकता है। हालांकि आप इसके उज्जवल पक्ष को भी देख सकते है , जो लोग अपने परिवार को समय नहीं दे पाते थे वे अपने परिवार के साथ खूब घुल मिल रहे है ,खूब जान रहे है ,समझ रहे है।
घरों में लगातार रहने से लोग मानसिक अवसाद का शिकार भी हो रहे है । ऐसे समय में खुद को खुश रखने की ज़रूरत है । घर में बैठे है तो खाना बनाना ही सिख ले, योग करें या अपने किसी डेड टैलेंट को पुनर्जीवित करने का प्रयास करें। ये समय तो निश्चित ही बीत जाएगा और आप सब फिर से बाज़ारों के शोर को सुन्न सकेंगे लेकिन ज़रूरत है खुद को मानसिक तौर पर ज़िंदा रखना ,वरना कोरोना न सही अवसाद तो आपको मार ही चुका होगा।
Monday, 13 April 2020
दोस्तों सुन लो !
उन दोस्तों को माफ़ी, जिन्होंने अपने प्रेमियों की परवाह में ये परवाह करनी छोड़ दी कि एक दोस्त भी है. उन दोस्तों से माफ़ी, जिन्हें इस कगार पर पहुंचाने में कुछ हाथ हमारा भी रहा.
उन दोस्तों से भी माफ़ी, जिन्हें नए-पुराने दोस्तों के लिहाज में कुछ नए काज में कम गले लगाया. उनको ये कम बताया कि तू अब भी मेरा यार है. तू भी पुराना प्यार है.
उन दोस्तों को भी माफ़ी, जिनकी आंखों में अब आंसुओं की जगह चमक है. तो क्या हुआ जो रिश्तों में अब कुछ कम नमक है. नमकीन आंसू रिश्तों के नमक भी ले गए, ज़िंदगी के सबक दे गए.
माफ़ी उन दोस्तों से भी, जिन्हें लगा और लगता रहा कि हम कुछ बदल गए, ये सोचकर वो बिन बताए रिश्तों से निकल गए. गुनाह हमारा इतना था कि 'हमने कहा था वो सच, जो हर किसी की जु़बां पर था. मगर सच हो जाते हैं ज़हरीले.'
उन दोस्तों से भी जी भर माफ़ी, जिनके साथ को... स्नेह भरे हाथ को जकड़े जा चुके कंधों से मचकाकर गिरा दिया. रिश्तों की आज़ादी, सांस लेने की गुंजाइशों को पहले तुमने, फिर हमने दीवारों में चुनवा दिया.
उन दोस्तों से सबसे ज़्यादा माफ़ी, जिन्हें पता है कि मैं ग़लत हूं. इन दोस्तों को माफ़ी भी कि इन्हें पता है, फिर भी कहां पता है कि बचे रिश्तों के घर का क्या पता है.
उन दोस्तों को माफ़ी जिन्होंने बीते महीने कई रंग बदले।
उन दोस्तों से माफ़ी जिन्हें हमसें सिर्फ़ दोस्ती चाहिए थी और हमने दोस्ती के साथ साथ कई रिश्तों का फ्री वाउचर दे दिया ।
उन दोस्तों से माफी जिसने मुझे कभी मेरी कमियों की वजह से जज नहीं किया और हर गलती को सही बताने में लगे रहे ।
उन सब अच्छे बुरे दोस्तों को दिल से माफ़ी मांगी और दी जा रही है क्योंकि दिल जो हमारा है न बड़ा दोगला है; सबका ही हो लेता है।
उन दोस्तों से भी माफ़ी, जिन्हें नए-पुराने दोस्तों के लिहाज में कुछ नए काज में कम गले लगाया. उनको ये कम बताया कि तू अब भी मेरा यार है. तू भी पुराना प्यार है.
उन दोस्तों को भी माफ़ी, जिनकी आंखों में अब आंसुओं की जगह चमक है. तो क्या हुआ जो रिश्तों में अब कुछ कम नमक है. नमकीन आंसू रिश्तों के नमक भी ले गए, ज़िंदगी के सबक दे गए.
माफ़ी उन दोस्तों से भी, जिन्हें लगा और लगता रहा कि हम कुछ बदल गए, ये सोचकर वो बिन बताए रिश्तों से निकल गए. गुनाह हमारा इतना था कि 'हमने कहा था वो सच, जो हर किसी की जु़बां पर था. मगर सच हो जाते हैं ज़हरीले.'
उन दोस्तों से भी जी भर माफ़ी, जिनके साथ को... स्नेह भरे हाथ को जकड़े जा चुके कंधों से मचकाकर गिरा दिया. रिश्तों की आज़ादी, सांस लेने की गुंजाइशों को पहले तुमने, फिर हमने दीवारों में चुनवा दिया.
उन दोस्तों से सबसे ज़्यादा माफ़ी, जिन्हें पता है कि मैं ग़लत हूं. इन दोस्तों को माफ़ी भी कि इन्हें पता है, फिर भी कहां पता है कि बचे रिश्तों के घर का क्या पता है.
उन दोस्तों को माफ़ी जिन्होंने बीते महीने कई रंग बदले।
उन दोस्तों से माफ़ी जिन्हें हमसें सिर्फ़ दोस्ती चाहिए थी और हमने दोस्ती के साथ साथ कई रिश्तों का फ्री वाउचर दे दिया ।
उन दोस्तों से माफी जिसने मुझे कभी मेरी कमियों की वजह से जज नहीं किया और हर गलती को सही बताने में लगे रहे ।
उन सब अच्छे बुरे दोस्तों को दिल से माफ़ी मांगी और दी जा रही है क्योंकि दिल जो हमारा है न बड़ा दोगला है; सबका ही हो लेता है।
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