Monday, 3 August 2020

मी-लार्ड की राखी.

रक्षाबंधन का अर्थ होता है रक्षा करने वाला बंधन. ये बंधन बहनें अपने भाइयों को बांधती हैं और ज़रूरी नहीं कि भाई खून का संबंध रखता हो. रिश्ता बस विश्वास भर का होना चाहिए फिर चाहे राम हो या रहीम फ़र्क़ नहीं पड़ता. इसी बीच मध्यप्रदेश हाइकोर्ट में लड़की से छेड़छाड़ के मामले में एक आरोपी को जज ने इस शर्त पर ज़मानत दी कि वो उस लड़की से जाकर राखी बंधवायेगा और शगुन में ग्यारह हज़ार रुपये देगा. मुझे इस देश के न्यायव्यवस्था के विवेक पर शंका होती है..क्या ये सही तरीका था उस लड़की के लिए जिससे उस लड़के ने छेड़छाड़ की होगी और अब वो उससे रक्षा की उम्मीद रखने लगेगी? न्यायालय भी उस खाप पंचायत की तरह काम करने लगा है जहां किसी लड़की के बलात्कारी की सज़ा ये होती है कि वो लड़की से शादी कर ले.

जब कोर्ट अपने काम का तरीका बदल कर समाज में उदाहरण पेश करके वाहवाही टोहने लगती हैं तब कहीं एनकाउंटर और इंस्टेंट जस्टिस जैसी चीज़ भी दूसरे धड़े से आने लगती हैं. हम समाज के तौर पर बहुत अविकसित हैं इन सब स्टंट के लिए और कोई भी न्याय ऐसा नहीं होना चाहिए जैसे मध्यप्रदेश के उज्जैन की रहने वाली उस महिला के साथ हुआ वरना कोर्ट एक्सपेरिमेंट करता रह जायेगा और समाज कोर्ट की पहुँच से दूर हो जाएगा फिर कानून के लंबे हाथ किसी काम के नहीं रह जाएंगे.

Sunday, 12 July 2020

लॉकडाउन के बाद हम लंच पर एक ही इंसान के साथ रहेंगे। चाय भी उसी के साथ पी लेंगे। घूमना-फ़िरना भी उन्हीं के साथ हो जाएगा। कुछ और होना होगा तो वो भी उन्हीं के साथ हो जाएगा! जब ज़िन्दगी भर ये सारे काम एक ही इंसान के साथ करने हैं तो अलग़-अलग़ लोगों के साथ रहकर क्या करेंगे हम!
ज़रूरत हुई तो बताई भी जाएगी लेकिन बता कर भी क्या करेंगे हम और ज़रूरत हुई तो जताई भी जाएगी लेकिन जता के फिर क्या करेंगे हम.

Saturday, 4 July 2020

धन्यवाद

धन्यवाद सबको जिन्होंने जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं,मुबारकबाद या विश किया. जब कभी उदास होऊंगा तो आपकी लिखी शुभकामनाओं को पढ़ लूंगा, कितना अच्छा होता है जन्मदिन वाला दिन...भूल चुके लोग आपको फिर से एक बार याद कर लेते हैं. कभी कभी खुद पर संशय होता है कि जितना आप पर यकीन किया जाता है वो किया जाना चहिये या नही, जितना प्रेम किया जा रहा हो वो किया जाना चाहिए या नही. जवाब एक ही होता है 'सब भोलेनाथ की कृपा है'। धन्यवाद इस दिन को इतना सुंदर बनाने के लिए दोस्तों. इसे याद रखा जा सकता है. पीस आउट.

Friday, 8 May 2020

क्या लोग कोरोना की वजह से तनाव में आ गए है?


दुनिया ने साल 2020 की शुरुआत बड़े जोड़ शोर से की होगी । सब ने इस साल खुद को बेहतर बनाने और देश,दुनिया और समाज को नए हासिये पर गढ़ने के लिए कई रेसॉल्युशन्स लिए होंगे । सब ने सोचा होगा इस साल कुछ ज्यादा पढ़ेंगे ,कुछ ज्यादा खाएंगे-पियेंगे,कुछ ज्यादा जियेंगे। लेकिन कहानी बदलती है मार्च के महीने से , पूरे देश में तालाबंदी हो जाती है और सारे रेसोल्यूशन और सारी रणनीति ठंडे बस्ते में चली जाती है । लोग अपने ही घर के कैदी बन कर रह जाते है । आलम ये है कि परिवार कल्याण फोरम के कहना है कि इस लॉक डाउन का असर लोगों के आपसी रिश्तों पर पड़ेगा और आने वाले समय में तलाक का आंकड़ा बढ़ सकता है। हालांकि आप इसके उज्जवल पक्ष को भी देख सकते है , जो लोग अपने परिवार को समय नहीं दे पाते थे वे अपने परिवार के साथ खूब घुल मिल रहे है ,खूब जान रहे है ,समझ रहे है।
घरों में लगातार रहने से लोग मानसिक अवसाद का शिकार भी हो रहे है । ऐसे समय में खुद को खुश रखने की ज़रूरत है । घर में बैठे है तो खाना बनाना ही सिख ले, योग करें या अपने किसी डेड टैलेंट को पुनर्जीवित करने का प्रयास करें। ये समय तो  निश्चित ही बीत जाएगा और आप सब फिर से बाज़ारों के शोर को सुन्न सकेंगे लेकिन ज़रूरत है खुद को मानसिक तौर पर ज़िंदा रखना ,वरना कोरोना न सही अवसाद तो आपको मार ही चुका होगा।


Monday, 13 April 2020

दोस्तों सुन लो !

उन दोस्तों को माफ़ी, जिन्होंने अपने प्रेमियों की परवाह में ये परवाह करनी छोड़ दी कि एक दोस्त भी है. उन दोस्तों से माफ़ी, जिन्हें इस कगार पर पहुंचाने में कुछ हाथ हमारा  भी रहा.

उन दोस्तों से भी माफ़ी, जिन्हें नए-पुराने दोस्तों के लिहाज में कुछ नए काज में कम गले लगाया. उनको ये कम बताया कि तू अब भी मेरा यार है. तू भी पुराना प्यार है.

उन दोस्तों को भी माफ़ी, जिनकी आंखों में अब आंसुओं की जगह चमक है. तो क्या हुआ जो रिश्तों में अब कुछ कम नमक है. नमकीन आंसू रिश्तों के नमक भी ले गए, ज़िंदगी के सबक दे गए.

माफ़ी उन दोस्तों से भी, जिन्हें लगा और लगता रहा कि हम कुछ बदल गए, ये सोचकर वो बिन बताए रिश्तों से निकल गए. गुनाह हमारा इतना था कि 'हमने कहा था वो सच, जो हर किसी की जु़बां पर था. मगर सच हो जाते हैं ज़हरीले.'

उन दोस्तों से भी जी भर माफ़ी, जिनके साथ को... स्नेह भरे हाथ को जकड़े जा चुके कंधों से मचकाकर गिरा दिया. रिश्तों की आज़ादी, सांस लेने की गुंजाइशों को पहले तुमने, फिर हमने दीवारों में चुनवा दिया.

उन दोस्तों से सबसे ज़्यादा माफ़ी, जिन्हें पता है कि मैं ग़लत हूं. इन दोस्तों को माफ़ी भी कि इन्हें पता है, फिर भी कहां पता है कि बचे रिश्तों के घर का क्या पता है.

उन दोस्तों को माफ़ी जिन्होंने बीते महीने कई रंग बदले।

उन दोस्तों से माफ़ी जिन्हें हमसें सिर्फ़ दोस्ती चाहिए थी और हमने दोस्ती के साथ साथ कई रिश्तों का फ्री वाउचर दे दिया ।

उन दोस्तों से माफी जिसने मुझे कभी मेरी कमियों की वजह से जज नहीं किया और हर गलती को सही बताने में लगे रहे ।

उन सब अच्छे बुरे दोस्तों को दिल से माफ़ी मांगी और दी जा रही है क्योंकि दिल जो हमारा है न बड़ा दोगला है; सबका ही हो लेता है।

Saturday, 7 March 2020

Happy women's day

मुझे अपने आस पास के सभी महिला मित्रों को हैप्पी वोमेन्स डे कहना है । लेकिन मुझे आप सबों से ईर्ष्या भी होती रहती है समय समय पर लेकिन उससे ज्यादा सहानुभूति भी रखता हूं (शायद नहीं रखनी चाहिए).
कैसा लगता होगा जब हम देर शाम हम लड़के घूमते रहते है और आपको घर जल्दी जाना होता है, कैसा लगता होगा जब हम लड़के बस/ट्रेन में नींद आते ही पसर जाते है और आप नींद आते हुए भी न सो सके ,कैसा लगता होगा जब कोई छुए तो आपके  मन मे कई भावनाये आती होंगी. कैसा लगता होगा जब भाई को कही जाने की परमिशन मिल जाती होगी और आपको घंटो मिन्नतें करनी पड़ती होगी। अब pseudo-intellectual वाली बातें खत्म करता हूं क्योंकि कुछ जानने वाले इसको फ़िल्मी बातों से जोड़ के मुझ पर ठिठोली करेंगे। वैसे मेट्रो और बस में रिजर्व्ड सीट का समर्थन मैं भी नहीं करता 😂.

सच्चा मुसलमान कौन ?

‘ये हैं मेरे देश के सच्चे मुसलमान. एक सच्चे भारतीय.’

फ़िल्मों और हम लोगों को अब इस वाली लाइन से उठ जाना चाहिए. जहां हम किसी दाढ़ी वाले आतंकवादी या अनैतिक हरकत करने वाले मुसलमान के सामने फ़िल्मी सीन में किसी मुस्लिम शहीद का नाम लेते हैं या फिर सरफ़रोश फ़िल्म के इन्स्पेक्टर सलीम को पेश करते हुए सच्चा मुसलमान, सच्चा भारतीय बताते हैं. कलाम, अब्दुल हमीद और मौलाना आज़ाद. यानी देश की प्रकट सेवा करने वाला ही सच्चा मुसलमान ना माना जाए. BHU में संस्कृत के मुस्लिम प्रोफ़ेसर का विरोध कर रहे स्टूडेंट्स की मुस्कुराकर सेवा कर रहे चाँद मोहम्मद को भी उतना ही भारतीय माना जाए. देश की सेवा सिर्फ़ देश से जुड़ी बातें करके नहीं होती हैं. बहुत कुछ और है जो नागरिक बताने के लिए काफ़ी हैं. एक हिंदू की ही तरह मुसलमान का जान देना, पुलिस या किसी दूसरी फ़ील्ड में देश की प्रकट तौर पर सेवा करना या इरादतन दिखाना ज़रूरी नहीं है.

ख़ैर. जिस देश में एक क़ौम को नागरिक ही ना माना जा रहा हो, वहाँ इस बात को करने का क्या ही मतलब. जय हिंद.